RBI का ₹1 लाख करोड़ का बड़ा बॉन्ड बिक्री अभियान, बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी निकालने की तैयारी

RBI का ₹1 लाख करोड़ का बड़ा बॉन्ड बिक्री अभियान, बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी निकालने की तैयारी

VoS NEWS DESK | INDIA | 13 September 2026

RBI के अनुसार, सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री 16 सितंबर से शुरू होगी और इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। कुल बिक्री करीब ₹1 लाख करोड़ यानी लगभग 10.47 अरब डॉलर के बराबर होगी। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त रुपये की तरलता को वापस खींचना और मौद्रिक नीति के नियंत्रण को मजबूत बनाए रखना है।

बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी बढ़ने के पीछे विदेशी मुद्रा का बड़ा प्रवाह एक प्रमुख कारण है। एक विशेष विदेशी मुद्रा जुटाने की योजना के तहत बैंकों के माध्यम से लगभग 127 अरब डॉलर की राशि आई, जिससे RBI के विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए। इसके बदले घरेलू वित्तीय प्रणाली में बड़ी मात्रा में रुपये आए, जिससे अतिरिक्त तरलता पैदा हुई।

अतिरिक्त तरलता सामान्य परिस्थितियों में आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दे सकती है क्योंकि बैंकों के पास ऋण देने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है। लेकिन जब नकदी जरूरत से काफी अधिक हो जाए तो बाजार की अल्पकालिक ब्याज दरें RBI द्वारा निर्धारित दायरे से नीचे जाने लग सकती हैं। इससे मौद्रिक नीति का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत के लिए अतिरिक्त महंगाई जोखिम पैदा कर रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी का असर परिवहन, उत्पादन और उपभोक्ता कीमतों पर पड़ सकता है।

ऐसे माहौल में RBI के लिए एक तरफ आर्थिक गतिविधियों और बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त धन उपलब्ध रखना जरूरी है, जबकि दूसरी तरफ अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण है। बॉन्ड बिक्री इसी संतुलन को बनाए रखने का एक प्रमुख माध्यम है।

RBI ने इससे पहले भी तरलता को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों का इस्तेमाल किया था, लेकिन बैंकों की सीमित प्रतिक्रिया के बाद केंद्रीय बैंक ने सरकारी बॉन्ड की सीधी बिक्री का रास्ता अपनाया। यह तरीका बाजार से बड़ी मात्रा में नकदी निकालने में अधिक प्रभावी माना जाता है।

इस कदम का सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी असर पड़ सकता है। यदि बाजार में बड़ी मात्रा में सरकारी प्रतिभूतियां बिक्री के लिए आती हैं, तो बॉन्ड की कीमतों और उनकी यील्ड पर दबाव बन सकता है। इससे सरकार के लिए भविष्य में बाजार से धन जुटाने की लागत बढ़ने की संभावना भी देखी जा रही है।

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RBI का ₹1 लाख करोड़ का बॉन्ड बिक्री अभियान भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूद अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने की बड़ी कोशिश है। इसका लक्ष्य केवल बैंकिंग सिस्टम से पैसा निकालना नहीं, बल्कि ब्याज दरों और महंगाई पर मौद्रिक नीति का प्रभाव बनाए रखना भी है।

हालांकि, RBI के सामने चुनौती यह होगी कि तरलता को बहुत तेजी से कम करने से आर्थिक गतिविधियों और ऋण उपलब्धता पर नकारात्मक असर न पड़े। वैश्विक तेल कीमतों, महंगाई, विदेशी पूंजी प्रवाह और रुपये की स्थिति को देखते हुए आने वाले महीनों में केंद्रीय बैंक की नीति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

Source: Reuters • Economic Times

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