भारतीय रुपया 96 प्रति डॉलर के करीब स्थिर, विदेशी पूंजी निकासी के बीच RBI की भूमिका महत्वपूर्ण

भारतीय रुपया 96 प्रति डॉलर के करीब स्थिर, विदेशी पूंजी निकासी के बीच RBI की भूमिका महत्वपूर्ण

VoS NEWS DESK | BUSINESS | 30 सितंबर 2026

बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया लगभग 95.97 रुपये प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था। पिछले कारोबारी सत्र में यह लगभग 95.98 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस तरह दोनों सत्रों के बीच मुद्रा में बहुत सीमित बदलाव दर्ज हुआ।

रुपये की स्थिति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार से निकासी शामिल है। Reuters के अनुसार 29 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से लगभग 1.04 अरब डॉलर की निकासी की। यह कई महीनों में एक दिन की बड़ी निकासी में शामिल थी।

सितंबर में विदेशी निवेशकों की कुल निकासी लगभग 2.7 अरब डॉलर बताई गई है। विदेशी निवेश में कमी होने पर भारतीय बाजार में डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका भी इस दौरान महत्वपूर्ण बनी हुई है। Reuters के अनुसार सरकारी बैंकों को हाल के सप्ताहों में स्पॉट मार्केट में डॉलर बेचते हुए देखा गया है। बाजार में इस गतिविधि को रुपये पर अत्यधिक दबाव को सीमित करने के लिए RBI के समर्थन से जोड़ा गया है।

रुपये की दिशा केवल घरेलू बाजार से तय नहीं होती। अमेरिकी डॉलर की वैश्विक स्थिति, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें और वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान भी भारतीय मुद्रा को प्रभावित करता है।

कच्चे तेल की कीमतें भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। भारत बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। यदि वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत को तेल खरीदने के लिए अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव बन सकता है।

इसके विपरीत, तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल पर दबाव कुछ कम हो सकता है। हाल के दिनों में वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण मुद्रा बाजार भी प्रभावित हुआ है।

अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें भी रुपये के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि अमेरिकी दरें अपेक्षा से अधिक समय तक ऊंची रहती हैं, तो डॉलर में निवेश आकर्षक रह सकता है और उभरते बाजारों से पूंजी बाहर जाने का दबाव बढ़ सकता है।

दूसरी ओर, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर कुछ वैश्विक पूंजी उभरते बाजारों की ओर लौट सकती है। हालांकि वास्तविक पूंजी प्रवाह कई अन्य आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों पर भी निर्भर करता है।

Reuters के अनुसार सितंबर में रुपया लगभग 0.8 प्रतिशत कमजोर होने की दिशा में था, जबकि तीसरी तिमाही में इसमें लगभग 1.3 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज होने की संभावना बताई गई।

भारतीय मुद्रा के प्रदर्शन का असर आम लोगों और कारोबार पर भी पड़ सकता है। आयातित वस्तुओं, कच्चे माल, ऊर्जा और विदेशी सेवाओं की लागत रुपये की विनिमय दर से प्रभावित हो सकती है। वहीं निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए कमजोर रुपया अलग तरह का प्रभाव पैदा कर सकता है।

IT कंपनियों के लिए भी डॉलर-रुपये की दर महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है। हालांकि मुद्रा दर का वास्तविक प्रभाव कंपनी की लागत, हेजिंग और वैश्विक कारोबार की संरचना पर निर्भर करता है।

आने वाले दिनों में निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के संकेतों, तेल कीमतों और भारत में विदेशी निवेश के प्रवाह पर रहेगी।

रुपये का 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास कारोबार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुद्रा बाजार में यह स्तर निवेशकों और कारोबारियों के लिए एक प्रमुख संदर्भ बिंदु बना हुआ है। हालांकि दैनिक विनिमय दर कई घरेलू और वैश्विक कारकों के कारण बदल सकती है।

VoS STRATEGIC INSIGHT

रुपये की मौजूदा स्थिति को विदेशी पूंजी प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की वैश्विक मजबूती और RBI की बाजार गतिविधियों के साथ समझना जरूरी है। 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास स्थिरता के बावजूद मुद्रा बाजार में बाहरी जोखिम बने हुए हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक ब्याज दरों और विदेशी निवेश की दिशा रुपये के लिए महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे।

Source: Reuters

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