VoS NEWS DESK | SPORTS | 30 सितंबर 2026
महिला 4x400 मीटर रिले का मुकाबला भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। रिले दौड़ में चारों धाविकाओं को एक-एक चरण पूरा करते हुए बैटन को अगले धावक तक सुरक्षित पहुंचाना होता है। इस स्पर्धा में केवल व्यक्तिगत गति ही नहीं, बल्कि बैटन एक्सचेंज, तालमेल, रणनीति और अंतिम चरण में दबाव संभालना भी निर्णायक होता है।
भारतीय टीम की शुरुआत किरण पाहल ने की। शुरुआती चरण में भारत शीर्ष स्थान पर नहीं था, लेकिन टीम ने दौड़ के दौरान अपनी स्थिति लगातार मजबूत की। एम.आर. पूवम्मा और प्राची चौधरी ने मध्य चरण में भारत को पदक की मजबूत स्थिति में बनाए रखा।
अंतिम चरण में विथ्या रामराज ने बैटन संभाली। उनके सामने बहरीन की सलवा ईद नासर जैसी मजबूत धाविका थीं, जिन्होंने अंतिम चरण में अंतर कम करने की कोशिश की। इसके बावजूद विथ्या ने अपनी गति बनाए रखी और फिनिश लाइन पार करते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।
भारत ने 3:29.69 का समय दर्ज किया, जबकि बहरीन ने 3:30.21 और चीन ने 3:31.02 का समय हासिल किया। इस तरह भारतीय टीम ने मामूली अंतर के बावजूद स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इस जीत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चारों भारतीय एथलीट अलग-अलग अनुभव और खेल पृष्ठभूमि लेकर इस प्रतियोगिता में पहुंची थीं। रिले टीम में अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं का संयोजन देखने को मिला।
एम.आर. पूवम्मा भारतीय एथलेटिक्स की अनुभवी धाविकाओं में शामिल हैं और उन्होंने अपने करियर में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। दूसरी ओर विथ्या रामराज ने भी हाल के वर्षों में 400 मीटर और 400 मीटर बाधा दौड़ में अपनी पहचान बनाई है।
इस स्वर्ण पदक के साथ एशियाई खेलों में भारत की एथलेटिक्स टीम के प्रदर्शन को भी मजबूती मिली। रिले स्पर्धा में मिली सफलता भारतीय महिला ट्रैक एंड फील्ड खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
दौड़ के दौरान मौसम भी एक चुनौती रहा। बारिश के कारण ट्रैक की परिस्थितियां सामान्य से अलग थीं और एथलीटों को अपनी गति तथा संतुलन पर अतिरिक्त ध्यान देना पड़ा। ऐसी परिस्थितियों में टीम का समन्वय और बैटन एक्सचेंज और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत के लिए इस जीत का एक और पहलू महिला एथलेटिक्स में प्रतिस्पर्धा का बढ़ता स्तर है। 400 मीटर और रिले जैसे इवेंट में एशियाई स्तर पर कई देशों की टीमें लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं। इसलिए भारतीय टीम की जीत केवल समय के लिहाज से नहीं बल्कि कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच हासिल की गई उपलब्धि भी है।
इस मुकाबले ने यह भी दिखाया कि रिले स्पर्धा में चारों धाविकाओं की भूमिका अलग-अलग होती है। शुरुआती धावक को अच्छी शुरुआत देनी होती है, मध्य चरण के धावकों को स्थिति बनाए रखनी होती है और अंतिम धावक को दबाव के बीच दौड़ खत्म करनी होती है।
भारत की टीम ने इसी क्रम में अपनी स्थिति मजबूत की और अंतिम चरण में स्वर्ण पदक सुरक्षित किया। भारतीय प्रशंसकों के लिए यह जीत एशियाई खेलों में ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिताओं से जुड़ी एक प्रमुख खबर बन गई है।
VoS STRATEGIC INSIGHT
महिला 4x400 मीटर रिले में भारत का स्वर्ण पदक टीमवर्क, बैटन एक्सचेंज, रेस रणनीति और अंतिम चरण की गति के महत्व को सामने लाता है। एशियाई खेलों जैसे बड़े मंच पर व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ चारों खिलाड़ियों के बीच तालमेल भी परिणाम को प्रभावित करता है।
Source: Indian Express
