VoS NEWS DESK | BUSINESS | 30 सितंबर 2026
भारतीय शेयर बाजार सितंबर महीने के अंतिम कारोबारी दिन में कुछ सुधार के साथ खुला। Reuters के अनुसार Nifty 50 लगभग 0.2 प्रतिशत बढ़कर 22,762 के आसपास पहुंचा, जबकि BSE Sensex में लगभग 0.46 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई और यह 72,877.11 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था।
यह रिकवरी लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद आई। इससे पहले बाजार में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई थी।
बुधवार को IT शेयरों में तेजी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रही। Nifty IT index में लगभग 2.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बदलती बाजार अपेक्षाओं ने भी IT कंपनियों के शेयरों को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का प्रभाव भी बना हुआ है। Reuters के अनुसार सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 2.7 अरब डॉलर की निकासी की है। वर्ष की शुरुआत से विदेशी निवेशकों की कुल निकासी इससे काफी अधिक रही है।
विदेशी पूंजी की निकासी भारतीय बाजार के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी मात्रा में विदेशी निवेश खरीद और बिक्री की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बेचकर पूंजी बाहर ले जाते हैं, तो बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बन सकता है और डॉलर की मांग भी बढ़ सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
हाल के दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ाई है। तेल की कीमतों में बदलाव का असर भारत की महंगाई, व्यापार घाटे और कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है।
बाजार में बैंकिंग क्षेत्र के बड़े शेयरों का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहा। ICICI Bank और Reliance Industries जैसे प्रमुख शेयरों में बढ़त देखी गई, जबकि HDFC Bank में गिरावट रही। छोटे और मझोले शेयरों के सूचकांकों में भी बढ़त दर्ज हुई।
सितंबर महीने का प्रदर्शन हालांकि बाजार के लिए कमजोर रहा। दो प्रमुख सूचकांकों में महीने के दौरान लगभग 5.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज होने की जानकारी Reuters ने दी। ऐसे में अंतिम कारोबारी दिन की बढ़त को व्यापक बाजार रुझान के बजाय एक सीमित रिकवरी के रूप में देखा जा सकता है।
निवेशकों की नजर अब वैश्विक ब्याज दरों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पूंजी के प्रवाह पर बनी हुई है।
इसके अलावा भारतीय कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। IT क्षेत्र में अमेरिकी बाजार की मांग, वैश्विक तकनीकी खर्च और डॉलर-रुपये की विनिमय दर जैसे कारक विशेष महत्व रखते हैं।
बाजार में दैनिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े व्यापक संकेतक और वैश्विक परिस्थितियां निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह स्पष्ट होगा कि हाल की रिकवरी कितनी स्थिर रहती है।
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भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा गतिविधि को समझने के लिए विदेशी निवेश, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदें और IT क्षेत्र का प्रदर्शन महत्वपूर्ण संकेतक हैं। 30 सितंबर की बढ़त ने हाल की गिरावट के बाद कुछ सुधार दिखाया, लेकिन बाजार अभी भी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित हो रहा है।
Source: Reuters
