सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान, भारत में सूखे का खतरा बढ़ा

सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान, भारत में सूखे का खतरा बढ़ा

VoS NEWS DESK | राष्ट्रीय मौसम | 1 सितंबर 2026

भारत का चार महीने का दक्षिण-पश्चिम मानसून अब कमजोर स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है। IMD के ताजा अनुमान के मुताबिक, सितंबर — जो मानसून के अंतिम महीनों में से एक है — में देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है। हालांकि, पूर्वी और पूर्व-मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।

1 जून से 30 अगस्त तक भारत में लगभग 603.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा करीब 700.7 मिलीमीटर है। इससे मौसमी बारिश में लगभग 14% की कमी दर्ज हुई है। मौसम विशेषज्ञों ने इस कमी के पीछे मजबूत El Niño परिस्थितियों को भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया है।

अगस्त में स्थिति और कमजोर रही। देशभर में अगस्त की बारिश सामान्य से लगभग 16% कम रही, जिससे पूरे मानसून सत्र की कमी और बढ़ गई। IMD के अनुसार अगस्त 2026 में भारत में लगभग 213.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो 2001 के बाद अगस्त के सबसे कम आंकड़ों में शामिल है।

कम बारिश का सबसे सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। कपास, सोयाबीन, मक्का और दलहन जैसी खरीफ फसलें इस समय विकास के महत्वपूर्ण चरण में हैं। पर्याप्त बारिश नहीं होने पर मिट्टी में नमी कम हो सकती है और फसलों की पैदावार तथा गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।

कम मानसूनी बारिश का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। जलाशयों में पानी का स्तर, पेयजल उपलब्धता, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन भी प्रभावित हो सकते हैं। लंबे समय तक बारिश की कमी रहने पर कई राज्यों को जल प्रबंधन और कृषि योजना में अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।

मौसम विभाग ने यह भी अनुमान लगाया है कि सितंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकते हैं। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने का संयोजन कुछ क्षेत्रों में गर्मी और जल-संकट की स्थिति को और गंभीर बना सकता है।

हालांकि पूरे देश में स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। IMD के अनुसार पूर्वी भारत, पूर्वी-मध्य भारत और कुछ अन्य क्षेत्रों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है, जबकि कई अन्य हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

मौसम विभाग ने संबंधित एजेंसियों और राज्यों को जल संरक्षण, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और कृषि के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार रखने की सलाह दी है। इन उपायों से कम बारिश के संभावित प्रभाव को सीमित करने में मदद मिल सकती है।

VoS NATIONAL INSIGHT

सितंबर में कमजोर बारिश का पूर्वानुमान भारत के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय है क्योंकि देश की बड़ी आबादी और कृषि अर्थव्यवस्था अभी भी मानसून पर काफी निर्भर है।

यदि बारिश की कमी सितंबर में भी जारी रहती है, तो इसका असर फसल उत्पादन, खाद्य कीमतों, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेष रूप से वे क्षेत्र अधिक संवेदनशील होंगे जहां सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अच्छी बारिश होने की संभावना बनी हुई है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बारिश की कमी इस मानसून को हाल के वर्षों के कमजोर मानसून में शामिल कर सकती है।

आने वाले सप्ताहों में बारिश का वास्तविक वितरण निर्णायक होगा। फिलहाल IMD का संदेश स्पष्ट है: सितंबर में कम बारिश और अपेक्षाकृत अधिक तापमान के लिए राज्यों, किसानों और जल प्रबंधन एजेंसियों को तैयार रहना होगा।

स्रोत: India Meteorological Department (IMD) / Reuters / The Tribune / VoS News Desk. 

क्या आपको यह लेख पसंद आया?

विशेष समाचार और दैनिक अपडेट प्राप्त करने के लिए सब्सक्राइब करें।

मुख्य पृष्ठ पर वापस