मुंबई में खाद्य उत्पादों की एक्सपायरी तारीख और पोषण लेबल बदलने वाले गिरोह का पर्दाफाश

मुंबई में खाद्य उत्पादों की एक्सपायरी तारीख और पोषण लेबल बदलने वाले गिरोह का पर्दाफाश

VoS NEWS DESK | INDIA | 2 सितंबर 2026

यह मामला तब सामने आया जब महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नवी मुंबई में स्थित एक गोदाम पर छापेमारी की। अधिकारियों ने वहां ऐसे खाद्य उत्पाद पाए जिनकी मूल एक्सपायरी तारीखों और पोषण संबंधी जानकारियों में कथित तौर पर बदलाव किया जा रहा था।

जांच के अनुसार, Sadhana Enterprises नामक प्रतिष्ठान में मूल पैकेजिंग पर मौजूद एक्सपायरी तारीख को रसायनों की मदद से मिटाया जाता था और उसके बाद प्रिंटिंग मशीनों के जरिए नई जानकारी लगाई जाती थी। इससे ऐसे उत्पादों को दोबारा बिक्री या निर्यात के लिए तैयार किया जा सकता था जिनकी मूल शेल्फ लाइफ समाप्त हो चुकी थी या समाप्त होने के करीब थी।

अधिकारियों ने जांच के दौरान Lay’s चिप्स, Maggi नूडल्स और Thums Up तथा Limca जैसे पेय पदार्थों सहित कई उत्पाद जब्त किए। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ नकली लेबल कई भाषाओं में तैयार किए गए थे, जिससे संकेत मिलता है कि इन उत्पादों को विदेशी बाजारों में भेजने की योजना भी हो सकती थी।

यह कार्रवाई केवल नकली लेबलिंग का मामला नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है। किसी खाद्य उत्पाद की एक्सपायरी तारीख बदलने से उपभोक्ता को यह गलत जानकारी मिल सकती है कि उत्पाद अभी सुरक्षित और इस्तेमाल योग्य है।

पोषण संबंधी जानकारी में बदलाव भी महत्वपूर्ण चिंता पैदा करता है। उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदते समय कैलोरी, चीनी, वसा, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों की जानकारी पर भरोसा करते हैं। यदि यह जानकारी जानबूझकर बदली गई हो तो उपभोक्ता गलत निर्णय ले सकता है।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इस कार्रवाई को संगठित और व्यवस्थित धोखाधड़ी बताया है। अधिकारियों ने लगभग 80,000 डॉलर मूल्य का स्टॉक जब्त किया और मामले की जांच आगे बढ़ाई।

भारतीय अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि ऐसे उत्पाद कितने समय से इस नेटवर्क के माध्यम से तैयार किए जा रहे थे और इनमें से कितना सामान घरेलू बाजार या विदेशों तक पहुंच चुका है। जांच से यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गतिविधि में और कौन-कौन लोग या संस्थाएं शामिल थीं।

यह मामला वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में निगरानी की आवश्यकता को भी उजागर करता है। बड़े ब्रांडों के उत्पाद होने के बावजूद यदि किसी स्तर पर पैकेजिंग या लेबल बदले जा सकें, तो उपभोक्ता के लिए असली और बदली हुई जानकारी के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

इस घटना के बाद खाद्य कंपनियों और निर्यातकों पर भी अपनी सप्लाई चेन की निगरानी मजबूत करने का दबाव बढ़ सकता है। उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, गोदाम और निर्यात तक हर चरण में रिकॉर्ड और लेबल की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है। फिलहाल संबंधित वैश्विक कंपनियों की ओर से मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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नवी मुंबई की यह कार्रवाई दिखाती है कि खाद्य सुरक्षा केवल उत्पाद बनाने वाली कंपनी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन की निगरानी आवश्यक है। एक्सपायरी तारीख या पोषण संबंधी जानकारी में बदलाव उपभोक्ता के स्वास्थ्य और भरोसे दोनों को प्रभावित कर सकता है।

इस मामले की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कथित तौर पर नकली लेबल कई भाषाओं में तैयार किए गए थे। यदि जांच में यह साबित होता है कि ऐसे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजे गए, तो मामला केवल स्थानीय खाद्य सुरक्षा उल्लंघन नहीं रहेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय खाद्य आपूर्ति श्रृंखला से भी जुड़ जाएगा।

भारत में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए यह मामला एक महत्वपूर्ण परीक्षा भी है। सख्त निरीक्षण, डिजिटल ट्रैकिंग और सप्लाई चेन में बेहतर पारदर्शिता ऐसे मामलों को रोकने में मदद कर सकती है।

Source: Reuters / Maharashtra FDA / India Today / VoS News Desk.

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