VoS NEWS DESK | INDIA | 19 September 2026
ED की कार्रवाई तिरुपति मंदिर में तैयार किए जाने वाले लड्डू प्रसाद के लिए इस्तेमाल होने वाले घी की कथित मिलावट और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसी का कहना है कि कथित तौर पर ऐसे घी की आपूर्ति की गई जिसे वास्तविक दूध वसा वाले घी के बजाय विभिन्न वनस्पति तेलों और रसायनों से तैयार किया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार कथित मिलावटी घी तैयार करने के लिए रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल, पामोलीन और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया गया। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में ED द्वारा बताए गए कुछ रसायनों में MG-90, मोनोग्लिसराइड्स, Myvacet Soft 400 और acetic acid ester का भी उल्लेख है।
ED का आरोप है कि इस सामग्री से तैयार उत्पाद को Agmark Special Grade Cow Ghee के रूप में TTD को सप्लाई किया गया। एजेंसी के अनुसार कथित आपूर्ति और उत्पादन प्रक्रिया की जांच में दस्तावेजों, खरीद रिकॉर्ड और संबंधित कंपनियों के बीच हुए लेन-देन को भी देखा जा रहा है।
कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष Prevention of Money Laundering Act (PMLA) अदालत, विशाखापत्तनम में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह कार्रवाई ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत हुई है।
ED की जांच जिस मूल मामले से जुड़ी है, उसमें तिरुपति ईस्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के आधार पर साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और TTD को घी की आपूर्ति में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच शुरू हुई थी। इसके बाद ED ने मामले के वित्तीय पहलू की जांच अपने हाथ में ली।
जांच एजेंसी के अनुसार 2019 से 2024 के बीच TTD को कथित रूप से सप्लाई किए गए घी की कुल कीमत लगभग 230 करोड़ रुपये थी। ED का आरोप है कि इस पूरी सप्लाई में से लगभग 96 करोड़ रुपये मूल्य का कथित मिलावटी घी मंगला से जुड़ी उत्पादन गतिविधियों के माध्यम से तैयार किया गया था।
ED के अनुसार मंगला कथित रूप से मिलावटी सामग्री की खरीद और अपनी फैक्ट्री में उसके इस्तेमाल से जुड़ी गतिविधियों में शामिल थे। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि सप्लाई को कुछ फ्रंट संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। जांच में इन संस्थाओं और उनके बीच के कारोबारी संबंधों को भी देखा जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार ED ने जिन संस्थाओं का उल्लेख किया है, उनमें Sri Vyshnavi Dairy Specialities Pvt Ltd, Malganga Milk & Agro Products Pvt Ltd और A.R. Dairy Foods Pvt Ltd शामिल हैं। एजेंसी इन कंपनियों के माध्यम से कथित सप्लाई नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित गतिविधियों को छिपाने के लिए बिक्री और खरीद से संबंधित रिकॉर्ड बनाए और रखे गए थे। ED का कहना है कि इन रिकॉर्डों का इस्तेमाल वास्तविक उत्पादन प्रक्रिया और कथित मिलावटी सामग्री के इस्तेमाल को छिपाने तथा वास्तविक घी की सप्लाई का स्वरूप प्रस्तुत करने के लिए किया गया।
तिरुपति लड्डू मामले में घी की गुणवत्ता का मुद्दा पहले भी व्यापक सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है। मौजूदा ED जांच ने इस मामले को केवल खाद्य गुणवत्ता के सवाल तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि संभावित वित्तीय लेन-देन, कंपनियों के नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं को भी जांच के दायरे में ला दिया है।
मंगला की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी अब कथित सप्लाई नेटवर्क के अन्य हिस्सों की भी जांच कर रही है। इसमें कच्चे माल की खरीद, उत्पादन, पैकेजिंग, दस्तावेजी रिकॉर्ड, भुगतान और TTD तक कथित सप्लाई की पूरी श्रृंखला शामिल है।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि ED द्वारा लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर हैं। किसी व्यक्ति या कंपनी की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक निर्णय के आधार पर तय होगी। इसलिए जांच एजेंसी के आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
ED की कार्रवाई से यह मामला अब वित्तीय अपराध की जांच के एक व्यापक चरण में पहुंच गया है। आने वाले समय में अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेज, जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और अन्य संबंधित पक्षों से पूछताछ मामले की दिशा को स्पष्ट कर सकती है।
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तिरुपति लड्डू मामले में ED की ताजा कार्रवाई कथित मिलावटी घी की आपूर्ति से जुड़े वित्तीय और मनी लॉन्ड्रिंग पहलुओं पर केंद्रित है। एजेंसी ने सुकृति फूड्स के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया और विशेष PMLA अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा।
जांच में 2019 से 2024 के बीच लगभग 230 करोड़ रुपये की कथित घी सप्लाई और उसमें से 96 करोड़ रुपये के कथित मिलावटी घी से जुड़े आरोप सामने आए हैं। ED ने उत्पादन, सप्लाई नेटवर्क और कथित फर्जी रिकॉर्ड से संबंधित कई पहलुओं की जांच की बात कही है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति अभी तय नहीं हुई है। आगे की जांच और न्यायिक कार्यवाही यह निर्धारित करेगी कि आरोपों के समर्थन में कौन से साक्ष्य अदालत के सामने प्रस्तुत किए जाते हैं और संबंधित पक्षों की कानूनी जिम्मेदारी क्या बनती है।
Source: Enforcement Directorate; NDTV; The New Indian Express; Times of India.
