आर्कटिक क्षेत्र में पिघलती बर्फ ने व्यापार के नए रास्ते खोल दिए हैं, लेकिन इसके साथ ही रूस और चीन की बढ़ती जुगलबंदी ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। आज की रिपोर्ट के अनुसार, रूस आर्कटिक तटरेखा के आधे से अधिक हिस्से पर अपना प्रभुत्व जमा रहा है, जिससे "उत्तरी समुद्री मार्ग" (Northern Sea Route) पर उसका नियंत्रण और मजबूत हो गया है। ग्रीनलैंड अब इस भू-राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गया है, जहाँ नाटो देश और रूस-चीन धुरी अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये मार्ग एशिया और यूरोप के बीच की दूरी को 40% तक कम कर सकते हैं, लेकिन सैन्यीकरण और संप्रभुता के विवादों ने इसे एक "रणनीतिक युद्धक्षेत्र" बना दिया है। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इस क्षेत्र में 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' सुनिश्चित करने के लिए नई सुरक्षा संधियाँ शुरू की हैं। 2026 में आर्कटिक की स्थिति केवल जलवायु परिवर्तन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह वैश्विक व्यापार और रक्षा कूटनीति का सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा बन गई है।
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आर्कटिक व्यापार मार्ग पर बढ़ता वैश्विक तनाव और ग्रीनलैंड बना कूटनीति का नया केंद्र
17 April 2026
Voice Of Spain
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