शिक्षा के क्षेत्र में एक नई डिजिटल क्रांति का आगाज़ हुआ है जिसे 'ग्लोबल क्लासरूम' नाम दिया गया है। इस पहल के तहत, वर्चुअल रियलिटी (VR) का उपयोग करके अलग-अलग देशों के छात्र एक ही वर्चुअल लैब में जटिल वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दे रहे हैं। अब एक छात्र जो दिल्ली में है, वह न्यूयॉर्क या मैड्रिड के अपने साथी के साथ मिलकर रीयल-टाइम में एक आभासी दिल की सर्जरी या रासायनिक प्रतिक्रिया का अध्ययन कर सकता है। यह तकनीक भाषा की बाधाओं को भी खत्म कर रही है क्योंकि इसमें इन-बिल्ट रीयल-टाइम अनुवाद की सुविधा है।
इस नई शिक्षा पद्धति से न केवल संसाधनों की कमी दूर होगी, बल्कि छात्रों में वैश्विक सहयोग की भावना भी पैदा होगी। कई प्रमुख विश्वविद्यालयों ने इस तकनीक को अपने पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बना लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह 'हाइब्रिड लर्निंग' का भविष्य है, जहाँ भौगोलिक दूरियाँ अब ज्ञान प्राप्त करने में बाधा नहीं बनेंगी। स्कूलों में अब महंगे उपकरणों की जगह केवल VR हेडसेट्स की जरूरत होगी, जिससे उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा अधिक सस्ती और सुलभ हो जाएगी।
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'ग्लोबल क्लासरूम': वीआर तकनीक के माध्यम से दुनिया भर के छात्र अब एक साथ कर सकेंगे प्रैक्टिकल
25 April 2026
Voice Of Spain
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