आज मास्को में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में तीन और प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को संगठन में शामिल करने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इस विस्तार को 'ब्रिक्स+ प्लस' रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार में डॉलर के प्रभुत्व को कम करना और एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) को बढ़ावा देना है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इन नए देशों के आने से ब्रिक्स अब दुनिया की 45% से अधिक ऊर्जा आपूर्ति को नियंत्रित करेगा।
इस कदम को पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। भारत और चीन ने इस विस्तार का समर्थन करते हुए कहा है कि यह 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और मजबूत करेगा। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि इतने विविध देशों के एक साथ आने से संगठन के भीतर आंतरिक समन्वय की चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं। इस नए गठबंधन से आने वाले समय में वैश्विक व्यापार समझौतों और रक्षा कूटनीति में बड़े बदलाव की उम्मीद है।
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ब्रिक्स (BRICS) का विस्तार: 3 नए देशों की सदस्यता पर सहमति, वैश्विक गुटनिरपेक्षता को मिलेगी ताकत
15 April 2026
Voice Of Spain
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