13 जून, 2026 को असम के जोरहाट एयर फ़ोर्स स्टेशन पर इंडियन एयर फ़ोर्स का AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया और उसमें आग लग गई। इस वजह से कई लोगों की जान चली गई और इस हादसे के कारणों की तुरंत जांच शुरू हो गई। ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट लैंडिंग ऑपरेशन के दौरान नीचे गिर गया। चश्मदीदों ने बताया कि एयरक्राफ्ट को ज़मीन से टकराने और आग लगने से पहले पास आने में दिक्कत हुई। इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं, फायरफाइटिंग यूनिट और मेडिकल स्टाफ क्रैश साइट पर बचे लोगों की मदद करने और घायलों को निकालने के लिए पहुँचे। AN-32 एयरक्राफ्ट, सोवियत डिज़ाइन का ट्रांसपोर्ट प्लेन है जिसका इस्तेमाल इंडियन एयर फ़ोर्स कार्गो और लोगों को लाने-ले जाने के लिए बड़े पैमाने पर करती है। यह कई दशकों से IAF की सर्विस में है। यह क्रैश इंडियन मिलिट्री के लिए एक बड़ा नुकसान है और एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस, पायलट ट्रेनिंग और ऑपरेशनल तरीकों पर सवाल खड़े करता है। शुरुआती रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मौसम की स्थिति, मैकेनिकल खराबी या पायलट की गलती से यह हादसा हुआ होगा, हालांकि पक्का पता चलने के लिए फॉर्मल जांच पूरी होने का इंतज़ार करना होगा।
जोरहाट एयर फ़ोर्स स्टेशन पर हुआ क्रैश एक दुखद जान का नुकसान है और इससे इंडियन मिलिट्री में एविएशन सेफ़्टी को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। AN-32 एयरक्राफ़्ट पहले भी एक्सीडेंट का सामना कर चुका है, जिसमें 2019 में इसी इलाके में हुआ एक बड़ा क्रैश भी शामिल है, जिसमें उसमें सवार सभी लोग मारे गए थे। इंडियन एयर फ़ोर्स ने ऐसे हादसों को रोकने के लिए कई सेफ़्टी उपाय और मेंटेनेंस प्रोटोकॉल लागू किए हैं, हालाँकि बार-बार होने वाले एक्सीडेंट से पता चलता है कि सिस्टम से जुड़ी कुछ समस्याएँ हैं जिनका पूरा रिव्यू करने की ज़रूरत है। जाँच में एयरक्राफ़्ट मेंटेनेंस रिकॉर्ड, पायलट की क्वालिफ़िकेशन, मौसम की स्थिति और कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल की जाँच की जाएगी ताकि उन वजहों का पता लगाया जा सके जिनकी वजह से यह हुआ। एक्सीडेंट के हालात का इंडिपेंडेंट असेसमेंट करने के लिए इंटरनेशनल एविएशन एक्सपर्ट्स से सलाह ली जा सकती है। इस दुखद घटना के बाद इंडियन मिलिट्री में एयरक्राफ़्ट फ़्लीट मैनेजमेंट, पायलट ट्रेनिंग स्टैंडर्ड और ऑपरेशनल प्रोसीजर का रिव्यू किया जाएगा। जाँच आगे बढ़ने पर मरने वालों के परिवारों को मुआवज़ा और सपोर्ट सर्विस दी जाएगी। यह घटना मिलिट्री एविएशन ऑपरेशन से जुड़े अंदरूनी जोखिमों और कड़े सेफ़्टी प्रोटोकॉल और एविएशन सेफ़्टी प्रैक्टिस में लगातार सुधार के महत्व को दिखाती है।
