होर्मुज की नाकेबंदी और चीन की चेतावनी: क्या पश्चिम एशिया में छिड़ेगी एक बड़ी जंग?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक ऐसे खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी का रास्ता मुश्किल लग रहा है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नौसैनिक नाकेबंदी के आदेश के बाद, चीन ने पहली बार सीधे तौर पर अमेरिका को चेतावनी दी है। बीजिंग ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापारिक समझौतों का सम्मान करता रहेगा और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा। चीनी रक्षा मंत्री डोंग जून ने इसे "क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा" बताते हुए कहा कि चीन अपने हितों की रक्षा के लिए "निगरानी" कर रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल आपूर्ति की जीवन रेखा है, जहाँ से वैश्विक तेल का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $104 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश की, तो यह संघर्ष सीधे तौर पर दो महाशक्तियों (अमेरिका और चीन) के बीच टकराव का कारण बन सकता है। चीन, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, इस वक्त पाकिस्तान के साथ मिलकर कूटनीतिक दबाव बना रहा है ताकि इस्लामाबाद में रुकी हुई शांति वार्ता को फिर से शुरू किया जा सके, लेकिन ट्रंप की "मैक्सिमम प्रेशर" नीति ने स्थिति को और भी अधिक विस्फोटक बना दिया है।
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