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वैज्ञानिकों ने विकसित की 'प्लास्टिक-भक्षी' बैक्टीरिया की नई नस्ल, महासागरों की सफाई में बड़ी जीत
वैश्विक समुद्री प्रदूषण के खिलाफ जंग में आज एक अभूतपूर्व वैज्ञानिक सफलता की घोषणा की गई है। शोधकर्ताओं ने लैब में बैक्टीरिया की एक ऐसी नई नस्ल विकसित की है जो न केवल प्लास्टिक को 'खाती' है, बल्कि उसे ऊर्जा के रूप में उपयोग करके ऑक्सीजन छोड़ती है। यह तकनीक विशेष रूप से माइक्रोप्लास्टिक को लक्षित करती है, जो अब तक समुद्री जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा रहा है। परीक्षणों में देखा गया कि ये बैक्टीरिया समुद्र के खारे पानी में भी प्रभावी हैं और किसी भी हानिकारक उप-उत्पाद (by-product) के बिना प्लास्टिक को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं।
इस तकनीक के आने से दुनिया के 'ग्रेट पैसिफिक गार्बेज पैच' जैसे विशाल प्लास्टिक कचरे के ढेरों को साफ करने की उम्मीद जगी है। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसियों ने इस प्रोजेक्ट को "ब्लू क्लीनअप 2026" का नाम दिया है। हालांकि, कुछ वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इन बैक्टीरिया को खुले समुद्र में छोड़ने से पहले पारिस्थितिक संतुलन का गहन अध्ययन करना अनिवार्य है। यदि यह सफल रहता है, तो आने वाले दशक में हमारे महासागर फिर से अपनी प्राकृतिक शुद्धता प्राप्त कर सकते हैं, जिससे समुद्री जैव विविधता को संजीवनी मिलेगी।
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